October 16, 2021

बिना किसी सरकारी दुकान के गांव ही नहीं आस-पास के क्षेत्र में खुलेआम शराब बेची जा रही है।इसकी शिकायत भी कई बार हुई लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई।

*”शराब” के “अवैध कारोबार” को रोकने में कभी “गंभीर” नहीं रही “पुलिस” व “आबकारी” विभाग*
👉पांच दर्जन से अधिक गांवों में होता है जहरीली शराब का धंधा!
👉गंगा-यमुना के रास्ते व गैर जनपदों,प्रांतों से भी आती हैं नशे की खेपें!
👉उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद कागजी खानापूरी करने को की जाती छापेमारी!
👉भौली की घटना ने दिया बड़ा अल्टीमेटम,ना सुधरे तो कभी भी इससे भी बड़ी घट सकती है घटना!
👉मलाई खाने के चक्कर में जान कर भी अंजान बने रहते हैं जिम्मेदार!
👉पंचायत चुनाव के फुंके बिगुल के बाद भी जिम्मेदारों की जारी है बेपरवाही!
👉 मतदाताओं को रिझाने के लिए गांव-गांव दावेदारों ने चालू कर रखी है शराब पार्टियां!
*(हरीश शुक्ल)*
✍🏿 *जिले में अवैध शराब का कारोबार कोई नया नहीं है।यहां के 5 दर्जन से अधिक गांवों में कच्ची शराब को उतारने का काम किया जाता है।गैर जनपदों व प्रांतों से भी शराब का अवैध कारोबार लंबे समय से फल-फूल रहा है लेकिन इसे रोकने के ना तो आबकारी विभाग ने और ना ही पुलिस प्रशासन ने कोई ठोस प्रयास किए।* नतीजा यह रहा कि समय-समय पर यहां जहरीली शराब पीने से लोग या तो बीमार होते रहे या फिर मौत के आगोश में समा गए।गत दिनों गाजीपुर थाना क्षेत्र के भौली गांव में भी जहरीली शराब ने जहां दो लोगों को निगल लिया वहीं 19 लोग कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती हैं। *अब यह समझ में नहीं आ रहा कि जब सरकार जहरीली शराब के मामलों में गंभीर हो ताबड़तोड़ कार्रवाईयां कर रही है तो फिर जिले में जिम्मेदार इस ओर ठोस कदम उठाने से क्यों बच रहे हैं? यहां यह हाल तब है जब जिला प्रशासन को अवैध शराब के कारोबार के बारे में “सवाल तो पूछेंगे” कालम में फतेहपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री नागेंद्र प्रताप सिंह पहले ही आगाह चुके थे।* फिर भी विभागीय अधिकारी इस ओर संवेदनशील नहीं हुए और नतीजतन भौली गांव का परिणाम सामने आ गया।अब जिम्मेदारों पर कार्रवाई किए जाने की बात की जा रही है।
*गंगा-जमुना के दोआबा में बसे फतेहपुर जिले की भौगोलिक स्थिति कुछ ऐसी है कि अवैध शराब के कारोबारी यहां अपना धंधा खूब चमकाते रहे हैं।कभी गैर जनपदों तो कभी गैर प्रांतों से शराब की अवैध खेपों को लाकर यहां खपाया जाता रहा है।तो कभी रात के अंधेरे में गंगा-यमुना के रास्ते शराब के कारोबार को परवान चढ़ाया गया।ऐसा नहीं है कि होने वाले शराब के अवैध कारोबार से आबकारी व पुलिस अनभिज्ञ है।हकीकत यह है कि नशे का कारोबार करने वाले इनकी जानकारी में रहते हैं और मौन रहने के लिए इन्हें मोटी रकम मुहैया कराई जाती है।* उच्चाधिकारियों के निर्देश पर या फिर त्योहारों में अवैध शराब को लेकर छेडे जाने वाले अभियानों में जब नशे का अवैध कारोबार करने वाले मिलते हैं तो फिर इन पर स्थाई रूप से रोक क्यों नहीं लग पाती या यूं कहा जाए कि जिम्मेदार केवल कागजी खानापूरी व फर्ज अदायगी के लिए ही अवैध शराब को ढूंढने के लिए निकलते हैं। बाकी के दिनों में हर महीने नजराना लेकर कागजी घोड़े दौड़ाए जाते हैं। *पंचायत चुनाव का बिगुल फुंक चुका है और जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक संयुक्त रूप से बैठक व निरीक्षण कर शांति व्यवस्था,पारदर्शी चुनाव व अराजकतत्वों पर निगरानी रखने की समीक्षा कर रहे हैं।अवैध शराब को लेकर भी अभियान चलाने की बात की जा रही है तो फिर विभाग के जिम्मेदार इतने संवेदनहीन,धन लोलुपता में लिप्त कैसे हो जाते हैं कि उन्हें मौत के सौदागरों तक से हाथ मिलाने में कोई गुरेज नहीं रहता*।
*गाजीपुर थाना के भौली में जहरीली शराब पीने से दो लोगों की हुई मौत और 19 गंभीर रूप से बीमारों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि शराब के अवैध कारोबार को रोकने के ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे।* भले ही अधिकारी किसी भी कार्रवाई या हुई मौतों पर जांच रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हों लेकिन *जिस तरह से शराब खरीदने वाली इंद्रो पुल की दुकान के आसपास के लोग व ग्रामीण चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि बिना किसी सरकारी दुकान के गांव ही नहीं आस-पास के क्षेत्र में खुलेआम शराब बेची जा रही है।इसकी शिकायत भी कई बार हुई लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई।इतना ही नहीं लोगों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि कई बार मामला थाने तक पहुंचा जरूर लेकिन स्वयं आबकारी विभाग के अधिकारियों व पुलिस ने ही अवैध कारोबारियों से समझौता कराकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। नतीजा यह रहा कि क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री का धंधा दिन-रात फलता-फूलता रहा।* पंचायत चुनाव के फुंके बिगुल के बाद गांव-गांव वोटरों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए दावेदार शराब की खूब पार्टियां कर रहे हैं। *भौली की घटना ने बड़ा अल्टीमेटम दिया है!अभी भी समय है अगर अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाकर गैर कानूनी कार्य करने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई न की गई तो कब कितनी बड़ी घटना घट जाए यह कहा नहीं जा सकता।पुलिस को भी इस ओर गंभीर रहना होगा,कार्रवाई करनी होगी* देखना तो यह है कि गैर जनपदों से आने वाली अवैध शराब कि खेपों को ना तो आबकारी और ना ही पुलिस पकड़ पाती है जबकि एसटीएफ ने जिले में कई बार छापा मारकर नशे की जाने वाली खेपों को पकड़ा है।

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