October 16, 2021

वायरल वीडियो मामले में लखनऊ के अंबरगंज चौकी इंचार्ज हटाए गए।

राज्य अल्पसंख्यक आयोग में पेश हो कर क्षेत्राधिकारी ने दी जानकारी

राज्य अल्पसंख्यक आयोग में पेश हो कर क्षेत्राधिकारी ने दी जानकारी।

लखनऊ

वायरल वीडियो मामले में लखनऊ के अंबरगंज चौकी इंचार्ज हटाए गए।

राज्य अल्पसंख्यक आयोग में पेश हो कर क्षेत्राधिकारी ने दी जानकारी
राज्य अल्पसंख्यक आयोग में पेश हो कर क्षेत्राधिकारी ने दी जानकारी।

चौकी के अंदर महिला को गाली देने और पीटने के आरोप में हुई कार्रवाई

  1. राज्य अल्पसंख्यक आयोग में पेश हो कर क्षेत्राधिकारी ने दी जानकारी

आयोग ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर क्षेत्राधिकारी को आज किया था तलब

क्षेत्राधिकारी विजय राज सिंह ने अपने लिखित जवाब में आयोग को प्रकरण की जानकारी दी

चौकी इंचार्ज राकेश कुमार चौरसिया को हटा कर पुलिस उपायुक्त (पश्चिमी) के कार्यालय से सम्बद्ध किया गया

प्रकरण की आगे की जांच सहायक पुलिस आयुक्त चौक द्वारा की जा रही है।

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=988372982003644&id=100024928552138

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का मामला एंटी करप्ट सिस्टम न्यूज़ ने अपने संज्ञान में लेते हुए न्यूज़ को अपने वेब न्यूज़ पोर्टल वह क्राइम मीडिया यूट्यूब पर प्रसारित किया।

भ्रष्ट व्यवस्था विरोधी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस वीडियो में घटित घटना की घोर निंदा करते हैं और शासन व प्रशासन से मांग करते हैं कि इस तरह की घटनाओं को अपने संज्ञान में लें और महिला या पुरुष की ऐसी तमाम घटनाएं जो मीडिया या सोशल मीडिया में या लोगों तक प्रकाशित नहीं हो पाती हैं ऐसी उन घटनाओं पर नजर रखी जाए और ऐसे धूर्त और भ्रष्ट अधिकारी हो या जन समुदाय का व्यक्ति उसे दंडित किया जाए जिससे आने वाले समय में इस तरह की घटना की पुनरावृति पुणे ना उत्पन्न हो ।

लखनऊ से ब्रेकिंग न्यूज

 

मासूम बच्चे के सामने ही उसकी माँ को दरोगा जी ने चौकी के कमरे में बन्द करके पीटने का आरोप बिलखते बच्चे को भी घसीटने का आरोप

सआदतगंज थाना क्षेत्र के अंबरगंज चौकी का मामला।

 

सूबे की राजधानी में यह सब ? पुलिस चौकी में बच्चे के सामने माँ की बर्बरतापूर्ण पिटाई, साफ साफ दिखाई दे रहा है और आवाज भी आ रही है, इससे ज्यादा कोई सबूत पेश करने की जरूरत थोड़े ही है, अत्यंत दुःखद मामला है, महिला आयोग व मानव अधिकार आयोग के साथ साथ हाईकोर्ट व माननीय सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान में लेना चाहिए, न्याय दिलाने के लिए बर्खास्तगी से कम कोई कार्यवाही नहीं होनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं में कमी आये। पुलिस विभाग में अच्छे ऑफिसर की कोई कमी नहीं है लेकिन इस प्रकार की घटनाओं से आम जनमानस में गलत संदेश जाता हैं। वरिष्ठ अधिवक्ताओं व वरिष्ठ पत्रकारों को भी संज्ञान में लेना चाहिए ताकि पीड़िता को न्याय मिले।

रिपोर्ट एंटी करप्ट सिस्टम न्यूज़

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